चंपई सोरेन: जीवनी, आयु , जीवनसाथी ,परिवार , सम्पूर्ण विवरण – किसान से CM बनने तक की कहानी (झारखंड टाइगर)


चंपई सोरेन: हाल ही में झारखंड राज्य की राजनीति में आए उतार-चढ़ाव के वजह से झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को ED  ने मनीलांड्रिंग के केस में गिरफ्तार कर लिया है। झारखंड के CM हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी के पश्चात अब पार्टी ने चंपई सोरेन (Champai Soren) को मुख्यमंत्री के अगले चेहरे के रूप में चुना है।

अब चंपई सोरेन झारखंड के 7 वें मनोनीत मुख्यमंत्री बन गए हैं । Champai Soren के बारे में सोशल मीडिया पर किसी प्रकार की कोई अधिक जानकारी उपलब्ध नहीं है । अब तक चंपई सोरेन राजनीतिक पार्टी में कार्यरत तो थे परंतु उनकी सोशल लाइफ के बारे में और उनके परिवार इत्यादि के बारे में किसी को ज्यादा जानकारी नहीं थी । परंतु रातों रात Champai Soren टीवी और सोशल मीडिया के मुख्य चेहरे बन गए हैं जिसकी वजह से हर कोई चम्पई सोरेन के बारे में जानना चाहता है, कि यह आखिर है ? क्या है इनका फैमिली बैकग्राउंड?  और और राजनीति के क्षेत्र में इनका योगदान क्या है ? तो आज के इस लेख में हम आपको झारखंड के मुख्यमंत्री Champai Soren के बारे में विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराने वाले हैं।  हम आपको सोरेन के जीवन से संबंधित सारे महत्वपूर्ण तथ्य अपने इस लेख में उपलब्ध कराने वाले हैं।

चंपई सोरेन का शुरुआती जीवन

चंपई सोरेन जिन्हें झारखंड टाइगर के नाम से भी जाना जाता है इनका जन्म सरायकेला के जिलिंगगौड़ा गांव में 11 नवंबर 1956 को हुआ था।  उसके बाद चम्पई सोरेन  सरायकेला आदिवासी गांव खरसांवा में रहने लगे।

बचपन से ही आदिवासी गतिविधियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने वाले चंपई सोरेन के पिता पेशे से किसान थे और आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी भी थे उनका नाम सिमल सोरेन था और उनकी माता का नाम मादी सोरेन था । चम्पई सोरेन की माता भी अपने पति की खेती बाड़ी में मदद करती थी ।

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चंपई सोरेन की शिक्षा

चम्पई सोरेन केवल दसवीं कक्षा तक की ही पढ़ाई कर पाए  । अपनी दसवीं तक की पढ़ाई उन्होंने रामकृष्ण मिशन हाई स्कूल से पूरी की थी और उसके बाद में वह अपने आदिवासी गांव के राजनीतिक गतिविधियों में शामिल हो गए।

वैवाहिक जीवन

चंपई सोरेन जहां खुद आदिवासी राजनीति गतिविधियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे वहीं उनकी पत्नी भी मनकी सोरेन भी सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने वाली महिला रही है। चंपई सोरेन और मानकी सोरेन के 7 बच्चे हैं ।

चंपई सोरेन का पॉलिटिकल कैरियर

  • चंपई सोरेन ने झारखंड मुक्ति मोर्चा में अपना अतुल्य योगदान दिया था। उन्होंने झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन का भी बहुत ज्यादा साथ दिया था। झारखंड मुक्ति मोर्चा में लंबे योगदान की वजह से चंपई सोरेन को झारखंड टाइगर  के नाम से भी जाना जाता है ।
  • शिबू सोरेन के बेहद ही वफादार चंपई सोरेन शिबू सोरेन की सरकार के दौरान राज्य के परिवहन मंत्री थे।
  • चंपई सोरेन ने 1991 में अपने राजनीतिक कैरियर की शुरुआत की थी । उससे पहले वह अपने आदिवासी गांव में ही आदिवासियों के हित के लिए आए दिन जुझारू रूप से कोई ना कोई कदम उठाते रहते थे ।
  • परंतु पॉलिटिकल एक्टिव करियर की शुरुआत उन्होंने 1991 से कि जब वे सरायकेला सीट से उपचुनाव में निर्दलीय विधायक चुने गए ।
  • इसके 4 साल बाद उन्होंने झामुमो के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ा और भाजपा के उम्मीदवार पंचू टुडू को हराया ।
  • परंतु साल 2000 में विधानसभा चुनाव की झामुमो सीट से ही वह भाजपा के अनंतराम टुडू से हार गए।
  • इसके बाद 2005 में चंपई सोरेन ने भाजपा के उम्मीदवार को 880 मतों के अंतर से हराया और सीट पर फिर से कब्जा कर लिया।
  • इसके बाद चंपई सोरेन ने लगातार 2009, 2014, 2019 के चुनाव में जीत हासिल की और वह 2010 से 2013 के बीच bjp- jmmमें गठबंधन सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहे।
  • 2019 में हेमंत सोरेन की सरकार के दौरान चंपई सोरेन को खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति परिवहन मंत्री बनाया गया और इस प्रकार चौपाई सोरेन 1911 से राजनीति में काफी एक्टिव है

हेमंत सोरेन से चंपई सोरेन के रिश्ते

हेमंत सोरेन से चम्पई सोरेन के रिश्ते की बात करें तो दोनों का आपस में खून का कोई रिश्ता नहीं है, परंतु चंपई सोरेन ने शिबू सोरेन का झारखंड मुक्ति मोर्चा के दौरान बहुत साथ दिया है जिसके चलते हेमंत सोरेन चंपई सोरेन का बहुत आदर करते हैं। सार्वजनिक मंचों पर भी हेमंत सोरेंस अक्सर चंपई सोरेन के पैर छूकर आशीर्वाद लेते हुए देखे गए हैं। माना जाता है कि हेमंत सोरेन चंपई सोरेन को चाचा कह कर संबोधित करते हैं और सरकारी फैसलों के दौरान उनसे सलाह मशवरा भी करते हैं।

चंपई सोरेन का झारखंड राजनीति में योगदान

चंपई सोरेन का झारखंड की राजनीति में काफी महत्वपूर्ण योगदान  रहा है। उन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा के साथ-साथ हमेशा अनुसूचित जनजाति, जाति और पिछड़ा वर्ग कल्याण के काम बहुत ही बढ़-चढ़कर किए हैं। चंपई सोरेन कुछ मामलों में एक दो बार जेल भी जा चुके हैं। इनकी कुल संपत्ति की बात  करें तो उनके पास 2 करोड़ से अधिक की संपत्ति है।

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अब तक सम्भाले गए पद

चंपई सोरेन  ने अब तक बिहार विधानसभा से दो बार और झारखंड विधानसभा से चार बार पद संभाले हैं ।

  • 1991 से 1995 के बीच चंपई सोरेन ने बिहार विधानसभा के सरायकेला से विधायक का पद संभाला था ।
  • इसके पश्चात 1995 से 2000 तक उन्होंने बिहार विधानसभा के सरायकेला से फिर से विधायक का पद संभाला ।
  • 2005 से 2009 के बीच में उन्होंने इसी सीट से विधायक का पद संभाला।
  • इसके पश्चात 2009 से 2014 के बीच चंपई सोरेन ने झारखंड विधानसभा से विधायक के पद पर चुनाव लड़ा और कैबिनेट मंत्री बने ,जिसमें 2010 से 2013 तक वे विज्ञान और प्रौद्योगिकी, श्रम आवास कैबिनेट मंत्री रहे।
  • वहीं 2013 से 2014 तक खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति परिवहन मंत्री रहे।
  • चंपई सोरेन ने 2014 से 2019 के बीच झारखंड विधानसभा से फिर से विधायक के पद पर चुनाव लड़ा और 2019 से 2024 में हुए फिर से कैबिनेट मंत्री नियुक्त हुए।
  • 2019 से 2024 के बीच में चंपई सोरेन कैबिनेट में परिवहन ,अनुसूचित जनजाति अनुसूचित जाति एवं पिछडा वर्ग कल्याण मंत्रालय संभाल रहे थे ।
  • और 2024 में हेमंत सोरेन की मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तारी के पश्चात अब चंपई सोरेन झारखंड के सातवें मुख्यमंत्री बनाए गए हैं।

निष्कर्ष

इस प्रकार एक किसान परिवार में पैदा हुए चंपई सोरेन आदिवासियों के हक के लिए लड़ते-लड़ते राजनीति में आ गए और अब वह झारखंड के नए मुख्यमंत्री बन गए हैं।

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